एक जवान व्यक्ति की जीवन की पराकाष्ठा तभी होती है

सुप्रभात
एक जवान व्यक्ति की जीवन की पराकाष्ठा तभी होती है जब दोनों हाथों में रक्त का प्रभाव इस प्रकार का हो कि वह किसी भी कार्य को करने में तत्पर हो, पैरों में इस प्रकार की शक्ति कि इस पृथ्वी पर कहीं भी विचरण करने में समर्थ हो, हृदय में प्रेम और करुणा का भाव और आंखों में जिज्ञासा और मन में ज्ञान प्राप्ति की इच्छा हो, तो तभी जीवन में सफलता और दिव्यता की अनुभूति संभव है।
हरि ओम तत्सत

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